Exam में बेहतर परिणाम आए इसके लिए पढ़ाई पर कैसे ध्यान दें?

Exam में बेहतर परिणाम आए इसके लिए पढ़ाई पर कैसे ध्यान दें?

जैसे कि हम सब जानते हैं, आजकल एग्जाम यानी परीक्षा का समय चल रहा है।

इस समय पर जितना सट्रेस बच्चों को अपनी पढ़ाई का होता है उतना ही सट्रेस माता पिता को भी अपने बच्चों की पढ़ाई का होता है।

Exam में बेहतर परिणाम आए इसके लिए पढ़ाई पर कैसे ध्यान दें आइए जानें: 

चार साल का रुचिर अपनी मम्मी साधना को परेशान करने में कोई कसर नहीं छोड़ता।

कल उसके पापा काम से कहीं बाहर जा रहे थे, तो वह भी जाने की जिद करने लगा।


उसको रोकने के लिए साधना ने रुचिर को शाम को आइसक्रीम खिलाने का वादा किया, लेकिन, आइसक्रीम खिलाने का वादा साधना को बहुत महंगा पड़ गया क्योंकि, अब रुचिर अपनी मम्मी के पीछे पड़ गया और हर घंटे पूछ रहा था कि शाम कब होगी, शाम कब होगी आइसक्रीम खाने जाना है।

थक हार कर साधना उसे दोपहर में ही आइसक्रीम खिलाने ले गई और रुचिर आइसक्रीम खा कर ही शांत हुआ।

इस घटना में गौर करने वाली बात यह है कि रुचिर के सामने एक उद्देश्य था आइसक्रीम खाना

उसकी आइसक्रीम खाने की इच्छा इतनी गहरी थी कि वह अपनी मम्मी के लाख समझाने और समय-समय पर उसका ध्यान हटाने के

बावजूद बिल्कुल नहीं भूला और उसने समय से पहले ही आइसक्रीम खा कर ही दम लिया ।

ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि हमें अगर किसी लक्ष्य को प्राप्त करने की इच्छा तीव्र होती है तो उसे प्राप्त करना आसान हो जाता है और उससे ध्यान कभी नहीं भटकता है।

अगर हम इस थ्योरी को सच माने और सभी चीजों में प्रयोग करें तो अपने हर लक्ष्य को प्राप्त करना आसान हो सकता है।

परंतु, यह हर परिस्थिति पर लागू नहीं होता।

कुछ चीजें जो हमारे इच्छा के अनुरूप होती हैं, उन चीजों  को तो हम आसानी से बिना किसी भटकाव के प्राप्त करने में लग जाते हैं।

परंतु, कुछ चीजें जो हमारी ख्वाहिशों के विपरीत होती हैं उन चीजों को प्राप्त करना कठिन हो जाता है ।

जी हां! यहां हम पढ़ाई की बात कर रहे हैं।

पढ़ाई करने के समय ध्यान का भटकना एक आम बात है।

इसका कारण है कि पढ़ाई करने का लक्ष्य, जो हमें प्राप्त करना है, उस लक्ष्य के प्रति हमारा जुड़ाव नहीं हो पाता है।

इस कारण हमारा ध्यान भटक जाता है।

पढ़ाई करते समय मन को भटकने से बचाने के कुछ उपाय निम्न प्रकार हैं:

. लक्ष्य निर्धारित करें।

सबसे पहले अपने लक्ष्य को bold अक्षरों में लिखें।

अपने पढ़ने वाले कमरे में टेबल पर सामने ही चिपका दें।

लक्ष्य निर्धारित करने के पहले उस पर यह गौर करना जरूरी है कि आपका लक्ष्य क्या है?

आपने यह लक्ष्य क्यों बनाया है?

इसके प्राप्त होने पर आपको क्या हासिल होगा?

यह सोचना समझना अत्यंत आवश्यक है।

जब लक्ष्य को प्राप्त करने की खुशी और जरूरत का एहसास आपको होगा तभी लक्ष्य के प्रति जुड़ाव भी महसूस होगा।

जब लक्ष्य से जुड़ाव महसूस होता है, तो मन कम भटकता है।

२. प्रेरणा के स्त्रोत।

उस लक्ष्य से संबंधित कुछ तस्वीरें जो आपको प्रेरित करती है, उन्हें कमरे में टांगे।

आप जिन बड़ी हस्तियों को अपना आइडियल मानते हैं, उनकी तस्वीरें भी लगाने से प्रेरणा मिलती रहती है।

३. सुरुचिपूर्ण साजसज्जा।

जिस कमरे में आप पढ़ाई कर रहे हैं, उस कमरे को मनोहारी बनाना अच्छा है।

जैसे कि कमरा साफ और व्यवस्थित होना चाहिए।

कमरे में कुछ पौधे रखें जिन से ताजगी का अनुभव हो।

अपनी मनपसंद खुशबू स्प्रे करें या आप ताजे फूल भी रख सकते हैं।

आप अपना मनपसंद हल्का म्यूजिक भी चला सकते हैं।

यह सब करने से आपका कमरा साफ सुथरा, जीवंत, खुशनुमा और ताजगी भरा लगेगा।

जब मन प्रसन्न होगा तो पढ़ाई में भी मन अधिक लगेगा।

४. बेड नहीं टेबल कुर्सी पर पढ़े।

अच्छा हो कि पढ़ाई आप अपने बेडरूम में ना करें।

पढ़ने के लिए किसी अन्य जगह की व्यवस्था करें।

बेड रूम में पढ़ते समय अक्सर बच्चों को आलस आ जाता है

वहां का वातावरण भी उतना ताजगी भरा नहीं होता है।

अगर यह मुमकिन नहीं है तो अपने बेडरूम में ही टेबल पर पढ़े।

कभी भी बेड पर बैठ कर पढ़ाई ना करें।

५. एकरस्ता या बोर होने से बचें।

एकरसता हटाने के लिए अपने साथ कुछ हेल्दी स्नैक्स और नींबू पानी रखें

बीच-बीच में इसका का सेवन करें इससे आपको एनर्जी भी मिलेगी और बोरियत भी दूर होगी।

६. सिर्फ लक्ष्य नहीं लक्ष्य भेदन पर भी ध्यान दें।

अपने मन और ध्यान पर नियंत्रण रखने के लिए हर आधे घंटे पर अपनी प्रोग्रेस को चेक करें।

हर आधे घंटे में चेक करें कि पिछले आधे घंटे में कितनी पढ़ाई हुई और कितनी देर मन भटक गया।

स्वयं को फिर से याद दिलाएं कि आपको लक्ष्य के प्रति सजग रहना है।

ध्यान को इधर उधर नहीं जाने देना है।

बार बार याद दिलाने से मन एकाग्र चित्त होना शुरू हो जाता है।

अगर किसी कारणवश मन एकाग्र चित्त नहीं हो रहा है, तो भी स्वयं की अवहेलना ना करें।

धैर्य से काम ले धीरे-धीरे आपका ध्यान एकाग्र चित्त होने लगेगा।

७. उबन से बचें।

अपनी schedule में बीच-बीच में छोटे अंतराल के लिए अवकाश लेना अति आवश्यक है।

आप हल्का जलपान करिए बीच-बीच में व्यायाम करें बाहर खुली हवा में भी जा सकते हैं।

घर में किसी से बातचीत भी कर सकते हैं, जिससे मन शांत हो जाता है।

पढ़ाई की एकरसता को दूर करने के लिए भी कुछ समय का अवकाश मिल जाता है, जिससे आप दोबारा पढ़ने के लिए तैयार हो जाते हैं।

बेहतर होगा कि पढ़ाई करते समय फोन का इस्तेमाल ना करें, टीवी या इंटरनेट भी ना देखें

अपना मन बहलाने के लिए कुछ इनडोर गेम्स, आउटडोर गेम्स खेल सकते हैं।

उससे आपके मन में पुनः ऊर्जा का संचार हो जाता है।

८. टाइम शिड्यूलिंग करें।

अगर फोन करना हो टीवी देखना हो या इंटरनेट पर कुछ काम करना हो तो पहले ही समय निर्धारित कर ले।

अन्यथा इन चीजों में अक्सर कितना समय निकल जाता है पता ही नहीं चलता।

इसलिए अच्छा होगा कि अपने फोन पर अलार्म लगा दे ताकि आपको याद रहे कि कितनी देर आपको इसमें समय देना है

९. आत्म मूल्यांकन करें।

पूरे दिन की पढ़ाई हो जाने के बाद जब दिन खत्म हो जाता है, तो अपने दिन का रिव्यू करें।

हो सकता है कि पहले कुछ दिनों में जितना लक्ष्य शेडूल किया हो उसका केवल 30 या 40% ही प्राप्त हो सके, पर उसे घबराना नहीं है।

अगर आपने 40% या 50% प्राप्त किया है तो अपने आप की प्रशंसा करें

आपको जो प्राप्त नहीं हुआ है उसके लिए निराश ना हो और यह मत सोचिए कि आप तो कर ही नहीं सकते हैं।

आपने जितना भी प्राप्त किया है उसके लिए प्रसन्न रहे।

आप अपने लिए कोई मनपसंद खाना चॉकलेट या कोई भी  ऐसी चीज रखे जो आपको लगता है, कि दिन भर के बाद आपने जो किया है

उसके लिए आपको सम्मान के रूप में मिलनी चाहिए तो अपने को जरूर दें।

१०. निरंतर अभ्यास।

किसी कारणवश अगर आप अपना लक्ष्य प्राप्त करने में विजय नहीं हो पा रहे हैं।

तो आप घर में किसी और की मदद भी ले सकते हैं।

जैसे अपने मम्मी, पापा या भाई बहन या कोई भी जिसको आपसे लगाव हो।

आप उनसे अपने लिए मदद ले सकते हैं कि वह दिन में आपके साथ निरंतर रहकर आप से पूछते रहे और आपको मॉनिटर करें।

स्वयं की सेल्फ -मॉनिटरिंग शुरू में नहीं हो पाती है, तो किसी और की मदद लेना बहुत अच्छा तरीका है

अगर कोई दूसरा आपको मॉनिटर करता है, तो धीरे-धीरे अभ्यास करने से सेल्फ-मॉनिटरिंग भी आ जाती है।

११. पढ़ने का टाइम टेबल बनाएं।

अपनी पढ़ाई का टाइम टेबल प्रतिदिन का बनाइए ताकि उसमें जितना आप पूरा नहीं कर पाए हैं, उसे अगले दिन के टाइम टेबल में सलंग्न कर ले

इससे आप को तनाव भी नहीं होगा।

बस इस बात का ध्यान रखे कि अगले दिन आप अधिक जिम्मेदारी से काम पूरा करें। धीरे-धीरे आप अपने टाइम टेबल के अनुरूप हो जाएंगे।
रीडर्स पार्टिसिपेशन:

“लक्ष्य का चयन महत्वपूर्ण है किन्तु सफलता पूर्वक लक्ष्य भेदन उससे ज्यादा महत्पूर्ण होता है”|

क्यों कि जीवन में लक्ष्य तो अधिकांश लोग निर्धारित करते है पर लक्ष्य प्राप्ति किंचित को ही होती है| कृपया अपने विचारो से हमें अवगत कराये |

 

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